Skip to main content

पति की मृत्यु के तीन साल बाद मां बनी पत्नी

विज्ञान के इस दौर में तकरीबन हर वो चीज मुमकिन है जिसकी आप साधारण तौर पर कल्पना नहीं कर सकते हैं। मुंबई के जसलोक अस्पताल में महिला अपने पति की मृत्यु के तीन वर्ष बाद मां बनी है। लेकिन खास बात यह है कि महिला ने बच्चे को जन्म उसके पिता की मृत्यु के ठीक 3 साल बाद दिया है। दरअसल महिला के पति का रोड एक्सिडेंट में तीन साल पहले निधन हो गया था, लेकिन शादी से पहले दोनों ने आईवीएफ कराने का फैसला लिया था, जिसके बाद यह चमत्कार पति की मृत्यु के तीन साल बाद भी संभव हो सका है।
सड़क हादसे में मृत्यु
सुप्रिया जैन और गौरव एस की शादी के पांच साल बाद भी जब कोई बच्चा नहीं हुआ तो दोनों ने आईवीएफ कराने का फैसला लिया, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था, जैसे ही दोनों ने इस प्रक्रिया को कराया गौरव की एक सड़क हादसे में उसके बाद मृत्यु हो गई। हुबली में एक ट्रक ने गौरव की कार को टक्कर मार दी, जिसके बाद उस हादसे में उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद सुप्रिया सदमे में चली गई और वह ब्लॉग लिखकर अपनी निराशा को जाहिर करने लगी।
शादी से पहले कराया था आईवीएफ
गौरव की मृत्यु के कुछ हफ्तों बाद उन्होंने लिखा था कि जिस दिन वह जा रहा था, उसने हमारे नए बिजनेस का लोगो फाइनल किया था, वह कभी भी अपने माता-पिता के घर नहीं गया था, लेकिन घटना के एक दिन पहले वह अपने गांव गया था, वहां एक दिन भी गुजारा था। उसने घर छोड़ते वक्त कहा था कि वह जल्द ही अच्छी खबर के साथ वापस आएगा, जिसके बाद वह वहां से लौट रहा था। सुप्रिया मुख्य रूप से जयपुर की रहने वाली हैं और वह भाग्य और राशि पर भरोसा करती हैं। वह कहती हैं कि यह आईवीएफ कराने का फैसला हम दोनों ने लिया था लेकिन मैं इसे खत्म करना चाहती थी।

डॉक्टर पारिख ने की मदद
सुप्रिया बताती हैं कि उनके एक करीबी ने बताया कि वह अब भी मां बन सकती है, जिसके बाद मुंबई के डॉक्टर फिरूजा पारिख ने मेरी इसमे मदद की, जिसके बाद वह जसलोक अस्पताल में भर्ती हुईं और वहां यह प्रक्रिया शुरू हुई। डॉक्टर पारिख सुप्रिया की हर संभव मदद करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि हमने किस तरह से स्पर्म को बचाया और उसका इस्तेमाल किया यह बयान करना काफी मुश्किल है। हमने फैसला लिया कि हम अंडों को जमा करेंगे और कोशिश करेंगे कि बच्चो को जन्म दिलाया जा सके। लेकिन जब कई बार इस प्रक्रिया को करने के बाद सफलता नहीं मिली। लेकिन हमने सरोगेट ढूंढ़ने का फैसला लिया और इस बार हमारी आखिरी कोशिश रंग लाई और इस बार अंडे सुरक्षित तरीके से प्रजनन के लिए तैयार थे।
अब भागना नहीं पड़ेगा
सुप्रिया हर वर्ष अपने पति की पुण्यतिथि पर बाहर घूमने चली जाती थीं, जिस वक्त डॉक्टर पारिख ने सुप्रिया को इस बारे में बताया वह बाली में थीं। उस वक्त उन्हें बताया गया कि उनका एक बेटा पैदा हुआ है। आश्चर्य करने वाली बात यह है कि यह जानकारी उन्हें ठीक उस समय मिली जब उन्होंने आखिरी बार अपने पति से बात की थी। सुप्रिया कहती हैं कि मुझे उम्मीद है कि वह अपने पिता की तरह दिखता होगा, मैं बच्चा नहीं चाहती थी, मैं गौरव का बच्चा चाहती थी। हमने हमेशा इसका फैसला लिया था कि एक बच्चा पैदा करेंगे जबकि दूसरे बच्चे को गोद लेंगे। अच्छी बात यह है कि अब मैं कभी गौरव की पुण्यतिथि पर कहीं भागूंगी नहीं।

Comments

Popular posts from this blog

 अपने फ़ोन के लिए एंटीरेडिएशन ले यहाँ क्लिक करे https://www.amazon.in/gp/product/B075YXDX7Y/ref=as_li_tl?ie=UTF8&tag=shubhamjangir-21&camp=3638&creative=24630&linkCode=as2&creativeASIN=B075YXDX7Y&linkId=6c6735ed0198c6080596dc3dd963cceb
install this app and get 100 rs https://www.amazon.in/gp/product/B06XY52LP6/ref=as_li_tl?ie=UTF8&tag=shubhamjangir-21&camp=3638&creative=24630&linkCode=as2&creativeASIN=B06XY52LP6&linkId=38831a3844ee4ad17fe158c3855ab502